घर का रास्ता

रात भर का मेहमान हूँ, ऐ चाँद जानता हूँ मैं 

एक उम्र से हूँ बाहर, घर का रास्ता जानता हूँ मैं

— गुलज़ार

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Salem की आख़िरी रात - थोड़ी देर और, फिर वो रास्ता जो हमेशा याद रहता है।

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